[ LATEST 50+] Bewafa Shayari | बेवफा शायरी हिंदी में 2022 ❤

 

Bewafa Shayari

😑😭👋😥😬 

 रहने दे ये किताब तेरे काम की नहीं, 

 इस में लिखे हुए हैं वफाओं के तज़करे। 

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 जो हुकुम करता है वो इल्तज़ा भी करता है, 

 आसमान भी कहीं जाकर झुका करता है, 

 और तू बेवफा है तो ये खबर भी सुन ले, 

 इन्तज़ार मेरा कोई वहाँ भी करता है। 

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 दिल क्या मिलाओगे कि हमें हो गया यक़ीं, 

 तुम से तो ख़ाक में भी मिलाया न जाएगा। 

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 इस दौर में की थी जिस से वफ़ा की उम्मीद, 

 आखिर को उसी के हाथ का पत्थर लगा मुझे। 

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 इलाही क्यूँ नहीं उठती क़यामत माजरा क्या है, 

 हमारे सामने पहलू में वो दुश्मन के बैठे हैं। 

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 रोये कुछ इस तरह से मेरे जिस्म से लग के वो, 

 ऐसा लगा कि जैसे कभी बेवफा न थे वो। 

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 कुछ अलग ही करना है तो वफ़ा करो दोस्त, 

 बेवफाई तो सबने की है मज़बूरी के नाम पर। 

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 समेट कर ले जाओ अपने झूठे वादों के अधूरे क़िस्से 

 अगली मोहब्बत में तुम्हें फिर इनकी ज़रूरत पड़ेगी। 

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 उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा, 

 दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है। 

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 हर भूल तेरी माफ़ की तेरी हर खता को भुला दिया, 

 गम है कि मेरे प्यार का तूने बेवफाई सिला दिया। 

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 सिर्फ एक ही बात सीखी इन हुस्न वालों से हमने​​, 

 ​हसीन जिसकी जितनी अदा है वो उतना ही बेवफा है। 

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 कोई नहीं याद रखता वफ़ा करने वालों को, 

 मेरी मानो बेवफा हो लो जमाना याद रखेगा। 

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 हम जमाने में यूँ ही बेवफ़ा मशहूर हो गये दोस्त, 

 हजारों चाहने वाले थे किस-किस से वफ़ा करते। 

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 हो सके तो मुड़ कर देख लेना जाते जाते, 

 तेरे आने के भरम में ज़िन्दगी गुज़ार लेंगे। 

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 मेरी वफा फरेब थी मेरी वफा पे खाक डाल । 

 तुझसा ही कोई बावफा तुझको मिले खुदा करे। 

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 बंद कर देना खुली आँखों को मेरी आ के तुम, 

 अक्स तेरा देख कर कह दे न कोई बेवफा। 

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 मिल ही जाएगा कोई ना कोई टूट के चाहने वाला, 

 अब शहर का शहर तो बेवफा हो नहीं सकता। 

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 कैसे बुरा कह दूँ तेरी बेवफाई को, 

 यही तो है जिसने मुझे मशहूर किया है। 

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 उँगलियाँ आज भी इसी सोच में गुम हैं, 

 कि कैसे उसने नए हाथ को थामा होगा। 

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 तुम अगर याद रखोगे तो इनायत होगी, 

 वरना हमको कहाँ तुम से शिकायत होगी, 

 ये तो वही बेवफ़ा लोगों की दुनिया है, 

 तुम अगर भूल भी जाओ जो रिवायत होगी। 

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 उसकी ख्वाहिश है कि आँगन में उतरे सूरज, 

 भूल बैठा है कि खुद मोम का घर रखता है। 

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 जाते-जाते उसके आखिरी अल्फाज़ यही थे, 

 जी सको तो जी लेना मर जाओ तो बेहतर है। 

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 खुदा ने पूछा क्या सज़ा दूँ उस बेवफ़ा को, 

 दिल ने कहा मोहब्बत हो जाए उसे भी। 

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 इस दुनिया में वफ़ा करने वालों की कमी नहीं, 

 बस प्यार ही उससे हो जाता है जो बेवफा हो। 

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 मुझे शिकवा नहीं कुछ बेवफ़ाई का तेरी हरगिज़, 

 गिला तो तब हो अगर तूने किसी से निभाई हो। 

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 महफ़िल में गले मिल के वो धीरे से कह गए, 

 ये दुनिया की रस्म है मोहब्बत न समझ लेना। 

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 मेरे फन को तराशा है सभी के नेक इरादों ने, 

 किसी की बेवफाई ने किसी के झूठे वादों ने। 

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 अब के अब तस्लीम कर लें तू नहीं तो मैं सही, 

 कौन मानेगा कि हम में से बेवफा कोई नहीं। 

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 हमसे न करिये बातें यूँ बेरुखी से सनम, 

 होने लगे तो कुछ कुछ बेवफा से तुम। 

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 वाकिफ तो थे तेरी बेवफ़ाई की आदत से, 

 चाहा इसलिए कि तेरी फितरत बदल जाये। 

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 उसकी बेवफाई पे भी फ़िदा होती है जान अपनी, 

 अगर उस में वफ़ा होती तो क्या होता खुदा जाने। 

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 किसी का रूठ जाना और अचानक बेवफा होना, 

 मोहब्बत में यही लम्हा क़यामत की निशानी है। 

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 तेरा ख़याल दिल से मिटाया नहीं अभी, 

 बेवफा मैंने तुझको भुलाया नहीं अभी। 

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 बेवफाओं की इस दुनियां में संभलकर चलना, 

 यहाँ मुहब्बत से भी बर्बाद कर देते हैं लोग। 

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 मुझे मालूम है हम उनके बिना जी नहीं सकते, 

 उनका भी यही हाल है मगर किसी और के लिये। 

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 ये बेवफा वफा की कीमत क्या जाने, 

 है बेवफा गम-ऐ-मोहब्बत क्या जाने, 

 जिन्हें मिलता है हर मोड़ पर नया हमसफर, 

 वो भला प्यार की कीमत क्या जाने। 

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 अगर दुनिया में जीने की चाहत ना होती, 

 तो खुदा ने मोहब्बत बनाई ना होती, 

 इस तरह लोग मरने की आरज़ू ना करते, 

 अगर मोहब्बत में बेवफ़ाई ना होती। 

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 कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी, 

 कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी, 

 बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने, 

 आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी। 

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 फ़ुलो के साथ कांटे नसिब होते है, 

 ख़ुशी के साथ गम भी नसिब होता है, 

 यु तो मजबुरी ले डुबती हर आशिक को, 

 वरना ख़ुशी से बेवफ़ा कौन होता है? 

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 आज तुम्हारी याद ने मुझे रुला दिया, 

 क्या करूँ तुमने जो मुझे भुला दिया, 

 न करते वफ़ा न मिलती ये सजा, 

 मेरी वफ़ा ने तुझे बेवफा बना दिया। 

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 नजर नजर से मिलेगी तो सर झुका लेगा, 

 वह बेवफा है मेरा इम्तिहान क्या लेगा, 

 उसे चिराग जलाने को मत कह देना, 

 वह नासमझ है कहीं उंगलियां जला लेगा। 

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 तेरी मोहब्बत ने दिया सुकून इतना, 

 कि तेरे बाद कोई अच्छा न लगे, 

 तुझे करनी है बेवफ़ाई तो इस अदा से कर, 

 कि तेरे बाद कोई भी बेवफ़ा न लगे। 

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 दुनियाँ को अपना चेहरा दिखाना पड़ा मुझे, 

 पर्दा जो दरमियां था हटाना पड़ा मुझे, 

 रुसवाईयों के खौफ से महफिल में आज, 

 फिर इस बेवफा से हाथ मिलाना पड़ा मुझे। 

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 मेरी वफा के क़ाबिल नही हो तुम, 

 प्यार मिले ऐसे इन्सान नही हो तुम, 

 दिल क्या तुम पर ऐतबार करेगा, 

 प्यार मे धोखा दिया ऐसे बेवफा हो तुम। 

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 हम तो जल गये 

 उसकी मोहब्बत में मोमकी तरह, 

 फिर भी कोई बेवफा कहे 

 तो उसकी वफ़ा को सलाम। 

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 नजर उनकी जुबाँ उनकी 

 अजब है कि इस पर भी, 

 नजर कुछ और कहती है 

 जुबाँ कुछ और कहती है। 

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 उस के यूँ तर्क-ए-मोहब्बत का 

 सबब होगा कोई, 

 जी नहीं ये मानता 

 वो बेवफ़ा पहले से था। 

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 तेरी तो फितरत थी 

 सबसे मोहब्बत करने की, 

 हम बेवजह खुद को 

 खुशनसीब समझने लगे। 

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 इतनी मुश्किल भी ना थी 

 राह मेरी मोहब्बत की, 

 कुछ ज़माना खिलाफ हुआ 

 कुछ वो बेवफा हो गए। 

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 जा तुझ को तेरे हाल पे छोड़ा, 

 इस से बेहतर तेरी सजा भी क्या है। 

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 कैसे यकीन करें हम तेरी मोहब्बत का, 

 जब बिकती है बेवफाई तेरे ही नाम से। 

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 अब देखिये तो किस की जान जाती है, 

 मैंने उसकी और उसने मेरी कसम खायी है। 

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 अगले बरसों कि तरह होंगे करीने तेरे, 

 किसे मालुम नहीं बारह महीने तेरे। 

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 तेरी बेवफाई ने हमारा ये हाल कर दिया है, 

 हम नहीं रोते लोग हमें देख कर रोते हैं। 

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😑😭👋😥😬 

 जब तक न लगे एक बेवफाई की ठोकर, 

 हर किसी को अपने महबूब पे नाज़ होता है। 

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